भोपाल | 30-अक्तूबर-2020
विश्व स्ट्रोक दिवस पर जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में जागरूकता कार्यक्रम हुए। इस अवसर पर जनसमुदाय को स्ट्रोक के लक्षण एवं बचाव संबंधी जानकारी दी गई।
नागरिकों को बताया गया कि स्ट्रोक एक तरह का मस्तिष्क का अटैक है, जो मस्तिष्क को खून की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिका के फटने से या दिमाग की नसों में खून का बहना रूकने के कारण होता है। यह एक चिकित्सकीय आपातकाल की अवस्था है जिसमें मरीज को तुरंत अस्पताल में चिकित्सकीय उपचार की आश्यकता होती है। स्ट्रोक दुनियाभर में वयस्कों में विकलांगता का एक मुख्य कारण है।
स्ट्रोक के मरीजों में चलने, बोलने और समझने में परेशानी होना, चेहरा, हाथ या पैर में पक्षाघात या अकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। स्ट्रोक में लोगों को कमजोर मांसपेशियों के साथ पक्षाघात, चलने में परेशानी, मांसपेशियों में जकड़न, शरीर के एक तरफ लकवा या सामान्य से ज्यादा सजगता, कुछ समय के लिए एक आंख से दिखाई देना कम हो जाना, दो-दो दिखाई देना या धुंधला दिखना, आवाज चले जाना, बोलने में लड़खड़ाना या कठिनाई होना, बहुत उंचाई से नीचे देखने पर चक्कर, थकान या सिर घुमना, चुभन महसूस होना या स्पर्श कम महसूस होना जैसी परेशानियां होती हैं।
स्ट्रोक से बचने के लिए ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखना आवश्यक है, इसलिए ब्लड प्रेशर की जाँच नियमित रूप से कराना चाहिए। धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल युक्त खाने से परहेज करना एवं कैलोरी को बर्न करने के लिए शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। रोजाना सैर, व्यायाम, फल और हरी सब्जियों का सेवन कर स्ट्रोक की संभावना को बेहद कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के अवसर पर लोगों में जन-जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन के लिए परामर्श सत्रों का आयोजन किया गया। योग प्रशिक्षण एवं खान-पान संबंधी जानकारियां भी साझा की गई।

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