मंडी में फल और सब्जी के व्यापारी बताते हैं कि सब जमाखोरी का खेल है। मंडी में ही सब्जी कम आ रही है। दूसरी तरफ अब बड़े किसान भी खुद स्टॉक करने लगे हैं। इसके अलावा उत्पादन भी कम हुआ है। किसानों की रुचि भी कमजोर हुई है, जिसके बाद ये हालात पैदा हुए हैं।
एक दूसरे सब्जी वाले दुकानदार के यहां एक बुर्कानशीं औरत पूछती हैं, “भाई सबसे सस्ती सब्जी कौन सी है!” यह बेहद अजीबोगरीब सवाल है। अब पसंद से नहीं, जरूरत से सब्जी खरीदी जा रही है। दुकानदार बताता है कि ऐसे तो मूली सबसे सस्ती है, जो अभी 10 रुपये किलो है और जिसे अधिकतर लोग सलाद में खाते हैं। महिला आलू की कीमत जानना चाहती है और हैरतजदा हो जाती है। आलू 40 रुपये किलो है। नया आलू 60 रुपये बिक रहा है।

आलू सब्जियों का राजा है और उसका लगभग हर सब्जी के साथ गठबंधन होता है। 25 साल से सब्जी बेचने वाले इरशाद कहते हैं कि उन्होंने इतना महंगा आलू कभी नहीं बेचा। टमाटर और प्याज 60 रुपये से 80 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, मगर वो पहले भी इसी कीमत पर पहुंच चुके हैं। आजकल चिंता तो आलू बढ़ा रहा है।

मंडी में फल और सब्जी के व्यापारी हाजी अनवर कहते हैं कि सब स्टॉकिंग का खेल है। मंडी में सब्जी कम आ रही है। उत्पादन भी कम हुआ है। किसानों की रुचि कमजोर हुई है और बड़े किसान खुद स्टॉक करने लगे हैं। अनवर बताते हैं कि आलू की कुछ साल पहले बुरी गत हुई थी। आलू को सड़कों पर फेंका जा रहा था। इस बुरे हश्र के बाद आलू किसानों ने उसमें रुचि लेनी कम कर दी, जिसके बाद यह हालात पैदा हुए हैं।

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