दिल्ली में पली बढी एक सुसंस्कृत परिवार की बेटी ऋचा ने हमेशा शायरी का आनंद लिया है। वे मिर्जा गालिब, फैज अहमद फैज, बशीर बद्र, चकबस्त आदि के कामों से परिचित हैं। लेकिन अब अपने इस फिल्म के लिए, ऋचा शायरी में अपनी दिलचस्पी को बढ़ा रही है।

इसलिए जब लखनऊ में रिचा के लिए उनके आगामी प्रोजेक्ट की एक स्टार्ट-टू-फ़िनिश शेड्यूल तैयार किया गया, तो ऋचा चड्ढा काम पर वापस आने के लिए बेहद खुश थी। हमेशा की तरह अपने क्राफ्ट पर खरा उतरने के लिए, ऋचा ने अपने उर्दू उच्चारण, या ऐसे भी कह सकते है अपने किरदार के लिए उर्दू ‘तालफुज़’ सही करने में समय बिताया।

ऋचा बताती हैं, ” हम कलाकारों को अपनी भूमिका के प्रति ऑथेंटिक और समर्पित रहना आवश्यक है और एक अभिनेत्री के तौर पर हमारा यह धर्म है कि हम अपने चरित्र के प्रत्येक एलिमेंट को परफेक्टली एक्ट करें।
मुझे खुशी है कि इस फिल्म ने मुझे यह मौका दिया है। मुझे पहले से ही शायरी में दिलचस्पी थी। भाषा, स्थान और संस्कृति की खोज करना एक अभिनेता होने के नाते सबसे रोमांचकारी पहलू है। हर दिन कुछ नया सीखने का अनुभव है और इसकी शूटिंग करना, शेरो शायरी की पुरानी दुनिया में खो जाना जैसा रही है।”

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