आजकल अपन खतरनाक मूड में हैं… गड़बड़ करने वाले को छोड़ेंगे.. वोड़ेंगे नहीं…, फारम (फॉर्म) में है मामा.. और जे एक तरफ माफियाओं के खिलाफ अभियान चल रहा है.. मसल पावर का, माफिया सुन लो रे मध्य प्रदेश छोड़ जाना नहीं जमीन में गाड़ दूंगा 10 फीट। पता नहीं चलेगा कहीं भी किसी को। सुशासन का मतलब जनता परेशान न हो.. दादा, गुंडे, बदमाश, फन्ने खां ये कोई नहीं चलने वाले..।यह शब्द हैं 10 महीने पहले कांग्रेस की सरकार गिराकर चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने शिवराजसिंह चौहान के। शिवराज इस बार अलग ही रंग में हैं और विरोधियों के साथ माफियाओं को कड़ा संदेश देने के लिए ‘उग्र’ अंदाज अपनाने से बिल्कुल नहीं चूक रहे। पिछले तीन कार्यकाल में वे बेहद भावुक अंदाज में भाषण देने के लिए जाने जाते थे।खासकर, जमीन में 10 फीट गाड़ देने वाली भाषा शिवराज की कभी नहीं रही है। पिछले तीन कार्यकाल में वे राज्य को दंगामुक्त, भयमुक्त बनाने में कामयाब रहे और इसी पर उनका जोर रहा। शिवराज भले माफियाओं का जिक्र करते हुए उन्हें जमीन में गाड़ देने की बात कर रहे हों, लेकिन इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। प्रदेश की राजनीति के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने वालों के मुताबिक इस सबके पीछे या तो केंद्र से कुछ इशारा है या उन्हें हाईकमान ने सख्त फैसले के लिए फ्री हैंड दे दिया है। शिवराज जैसे दूसरे ‘योगी’ के रूप में ढलते नजर आ रहे हैं।शिवराज अपनी चौथी राजनीतिक पारी नए तरीके से खेल रहे हैं। पार्टी के भीतर भी ढेर सारे असंतुष्टों को साथ लेकर चलना है। चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के 100 दिन होने पर शिवराज ने कहा था कि यह कांटो भरा सफ़र है। जानकारों का मानना है कि अगर शिवराज इस पारी के चक्रव्यूह को कामयाबी से भेदकर बाहर निकल आए तो बीजेपी की अग्रिम पंक्ति में अपनी स्थाई सीट सुरक्षित कर लेंगे और तब अगला विधानसभा चुनाव जीतना भी भाजपा के लिए आसान हो जाएगा। शिवराज सिंह चौहान की छवि अभी तक कूल नेता की तरह थी। लेकिन पिछले दिनों हुए सख्त फैसलों और उनके लहजे से वह अपनी नई इमेज गढ़ रहे हैं।

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