झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के अधिवक्ता की ओर से समय की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद के अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि सीबीआई की ओर से जानबूझ कर मामले को लटकाने के लिए समय की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की जमानत अर्जी पर शीघ्र सुनवाई को लेकर 15 दिन पहले ही अदालत से आग्रह किया गया था और सीबीआई को भी नोटिस सर्व करा दिया गया था।
इसके बावजूद अधिवक्ता की ओर से लालू प्रसाद की जमानत अर्जी को लटकाने के उद्देश्य से ही समय का आग्रह किया गया। इस पर अदालत की ओर से भी यह टिप्पणी की गई, उन्हें जमानत अर्जी पर अपना काउंटर समय पर दे देना चाहिए। उन्होंने बताया कि सीबीआई अधिवक्ता की ओर से काफी आग्रह करने पर अदालत की ओर से उन्हें समय दे दिया गया, साथ ही 23 नवंबर तक काउंटर दे देने को कहा गया है, ताकि 27 नवंबर को मामले पर सुनवाई हो सके।

आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद की ओर से दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में जमानत अर्जी दाखिल की गयी है। इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए 7 साल की सजा दी है। सजा के दौरान इलाज के लिए लालू को रिम्स के केली बंगले में रखा गया है। लालू की ओर से याचिका में बताया गया है कि आधी सजा पूरी कर ली गई है, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। इसके अलावा उन्होंने अपनी बीमारी का भी हवाला दिया है। लालू प्रसाद के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में अर्जी देकर मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया था।

चारा घोटाला के मामले के लिए झारखंड हाई कोर्ट में एक सक्षम बेंच को गठित किया गया है। उस बेंच की सुनवाई सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार को ही की जाती है। 6 नवंबर को शुक्रवार है और अगर सुनवाई टल जाती है तो, अगले शुक्रवार 13 नवंबर और 20 नवंबर को हाईकोर्ट में दीपावली और छठ की छुट्टी है । ऐसे में अगले 2 सप्ताह उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी और जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की गयी है।

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