भोपाल-इंदौर की मेट्रो रेल के रास्ते में आने वाली निजी जमीनों, पक्के मकानों या कच्चे मकानों के अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार नए नियम लाने जा रही है। इसमें बाजार दर से एक लाख रुपए ज्यादा राशि देने के साथ यह प्रावधान भी पहली बार होगा कि गैर स्वामित्व वाले पट्‌टेधारी, झुग्गी या गुमठियां भी रास्ते में हैं तो उसे हटने पर मुआवजा मिलेगा। इसकी गणना आपसी सहमति से की जाएगी। राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए 350 करोड़ का प्रावधान किया है।

सरकार को जरूरत की तमाम जमीनें बिना किसी विवाद के मेट्रो रेल कंपनी को सौंपना है। अभी तक जो भी पिलर्स खड़े हो रहे हैं, वह सरकारी जमीन पर हैं, लेकिन मेट्रो जहां से टर्न करेगी, उस दौरान 125 वर्गमीटर की जगह की जरूरत होगी। मेट्रो स्टेशन बनाने के साथ प्रवेश, निकासी और सीढ़ियों के लिए भी निजी जमीनें जुटानी होंगी। इसीलिए नए नियम को कैबिनेट से मंजूर कराकर अधिग्रहण की कार्रवाई जल्द प्रारंभ की जाएगी।

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