मुस्लिम समाज में सामाजिक बदलाव की मिसाल बनी हैं दो महिलाएं। शहर की दो महिलाएं असामाजिक तत्वों की धमकियों से भी नहीं डरीं और मिसरोद कब्रिस्तान में हो रहे अतिक्रमण को रोकने में सफल हुईं। मप्र वक्फ बोर्ड ने कब्रिस्तान की सुरक्षा और निगरानी के लिए जो समिति बनाई, उसका अध्यक्ष एवं सचिव भी इन्हीं महिलाओं को बनाया। कब्रिस्तान पर पूर्व में लोग कब्जा करने की कोशिश कर चुके हैं।

इन महिलाओं ने मामला वक्फ बोर्ड प्रबंधन के संज्ञान में लाया तो उसने प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण को रोका। कोलार पुलिस की मदद ली गई। अब यहां 1.25 एकड़ जमीन बची है। 40-50 कब्रें है। जमीन वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। वक्फ बोर्ड के प्रभारी सीईओ मो. अहमद खान ने कहा कि समिति में अध्यक्ष एवं सचिव पद पर प्रदेश में पहली बार महिलाओं को मौका मिला है।

छींटाकशी हुई, लेकिन नहीं घबराए
हमारे सुसराल पक्ष के पूर्वज यहां दफन हैं। जब कब्रिस्तान में असामाजिक तत्वों ने निर्माण की कोशिश की तो हमने घर के पुरुषों को विवाद करने से मना करते हुए खुद मोर्चा संभाला। काफी छींटाकशी हुई, लेकिन हम घबराए नहीं। वक्फ बोर्ड और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाए तो हमें सबका सहयोग मिला। अब कोशिश है कि कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल बन जाए। -फरीदा बानो, अध्यक्ष, मिसरोद वक्फ कब्रिस्तान समिति
कब्रिस्तान मामले में मुनव्वर जहां बेगम का साथ फरीदा बाजी को मिलता था, लेकिन उनका इंतकाल हो गया। इसके बाद भी बाजी ने आंदोलन जारी रखा। यह देख मैंने उनका साथ देने का निर्णय लिया। जब हम लोग घर से वक्फ बोर्ड या कलेक्टर कार्यालय के लिए निकलते तो कुछ लोग हमें धमकियां देते, लेकिन हम नहीं डरे। समाज की खातिर हमने मोर्चा खोल ही लिया।

दोनों महिलाओं का संघर्ष सामाजिक बदलाव की मिसाल है। इसी तरह समाज की अन्य महिलाओं को आगे आना चाहिए।
-मो. माहिर, अध्यक्ष, मप्र मुस्लिम विकास परिषद

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