मप्र वक्फ बोर्ड में 11 दिन पहले प्रशासक का तबादला होने के बाद यहां नीतिगत फैसले अटक गए हैं। यहां प्रशासक का प्रभार एडिशनल कलेक्टर एस सतीशकुमार के पास अतिरिक्त रूप से था, उनका तबादला होने के बाद से अब तक यहां किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। दरअसल, पिछले ढाई साल से बोर्ड में संचालक मंडल नहीं है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में यहां प्रशासक की नियुक्ति की गई थी। संचालक मंडल की शक्तियां प्रशासक के पास होती है।

हालांकि संचालक मंडल का कार्यकाल पूरा होने पर छह माह में बोर्ड का गठन होना चाहिए, लेकिन इस व्यवस्था को दरकिनार करते हुए यहां प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई। अब हालत ये है कि 12 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की खातिर मुतवल्ली और प्रबंध समिति गठन का काम अटका हुआ है। नियुक्ति का अधिकार प्रशासक का होता हैं। इसी तरह वक्फ संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराने जैसे मामलों में कलेक्टर से पत्र व्यवहार करने का काम नहीं हो रहा है।

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