मध्य प्रदेश में ट्यूशन फीस को लेकर हाईकोर्ट में दोनों पक्ष अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को मंगलवार तक अपना पक्ष रखना है। दोनों की तरफ से अगर कोई सुझाव नहीं दिया जाता है तो कल ही इस मामले में निर्णय आ सकता है। हालांकि अभी एक सितंबर को जारी अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक के लिए जारी रखा गया है। कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को बीच का रास्ता निकालने को कहा गया है।

स्कूल फीस मामले में उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति संजय यादव एवं न्यायमूर्ति बीके श्रीवास्तव की युगल पीठ के सामने 24 सितंबर को सुनवाई हुई थी। न्यायालय द्वारा सभी पक्षकारों को एक ऐसा प्रस्ताव रखने को कहा था, जिसमें स्कूल शिक्षा के जुड़े सभी हितग्राहियों जैसे अभिभावक, विद्यार्थी, शिक्षक/अन्य गैर शैक्षणिक स्टाफ तथा स्कूल प्रबंधन सभी का हित सुरक्षित रहे।

इधर, अभिभावक संघ की तरह ही स्कूल प्रबंधकों और टीचरों ने भी अपना विरोध प्रदर्शन किया। इसे शिक्षा और टीचर बचाओ नाम दिया गया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में टीचर और स्कूल संचालक भोपाल में जमा हुए थे। इसमें कहा गया कि अगर अभिभावक स्कूल फीस नहीं भरेंगे, तो स्कूल का संचालन कैसे होगा। ऐसे में मजबूरी में स्कूल संचालकों को ऑन लाइन समेत अन्य सुविधाओं को बंद करते हुए शिक्षकों को नौकरी से निकालना होगा।

मार्च तक कई स्कूलों ने सत्र 2020-21 की फीस को लेकर घोषणा कर दी गई थी। इसकी जानकारी भी जिला शिक्षा अधिकारी को दे दी थी। इसमें सिर्फ ट्यूशन फीस ही स्कूलों को लेना होगी। जिन स्कूलों ने फीस की घोषणा नहीं की, वह स्कूल पिछले साल के आधार पर घोषित ट्यूशन फीस लेंगे। इसके अतिरिक्त कोई भी चार्ज या अन्य तरह के शुल्क नहीं लिए जा सकते हैं।

अभिभावकों का आरोप है कि कई स्कूलों ने सालभर की फीस को ही ट्यूशन फीस में जोड़ दिया। यह फीस लेने पर स्कूल संचालक दबाव बना रहे है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि ऐसा करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

फीस को लेकर सबसे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निजी स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश जारी किए थे। बावजूद इसके कई स्कूल पूरी फीस वसूलने पर अड़े थे। इसको लेकर कुछ स्कूलों ने हाईकोर्ट बेंच इंदौर में याचिका लगाई थी। जिस पर कोर्ट ने सरकार के आदेश पर स्थगन दिया था। इसी बीच हाईकोर्ट जबलपुर की बेंच में एक स्कूल के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही बताते हुए सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश दिए। दो आदेश होने से मामला जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच में चला गया था। इस पर कोर्ट ने 1 सितंबर को सिर्फ ट्यूशन फीस लिए जाने के आदेश जारी किए।

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