मालवा की शाजपुर से रतलाम तक की पूरी पट्‌टी प्याज उत्पादक है। पिछले साल 41 लाख टन प्याज पैदा हुई थी, इस बार 50 लाख टन हो सकती है, क्योंकि प्रदेश में इसका रकबा 1.80 लाख हेक्टेयर में हैं, जो पिछले साल से .16 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। वहीं, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र में अच्छी बारिश होने से देशभर के प्याज कारोबारी अपना माल मप्र में बेचने के लिए टूट पड़े हैं। फिर भी अच्छी आवक के बावजूद कीमतें बेलगाम हैं। भोपाल में प्रति किलो प्याज के दाम 10 दिन में 30 रु. बढ़ चुके हैं।

विभाग के सहायक संचालक आरबी पटेल कहते हैं कि अभी प्याज रतलाम, काला पीपल, शाजापुर, जमूनिया जैसी जगहों से आ रहा है। नवंबर अंत तक खंडवा और खरगोन से प्याज आना शुरू होगा। सागर और इससे लगे क्षेत्रों का प्याज फरवरी तक आएगा। विंध्य और महाकौशल के क्षेत्रों का प्याज मार्च से मई तक आएगा।

भोपाल में सब्जी के थोक विक्रेता अच्छे कुरैशी के मुताबिक भोपाल की मंडी में रोजाना 4000 क्विंटल प्याज आ रही है। इसमें 400 क्विंटल ही फुटकर बाजार में आई। इसका थोक भाव 52 रुपए था, जो फुटकर में 70 रुपए किलो बिकी। शेष प्याज बिचौलियों ने 58 रुपए किलो में खरीदकर दिल्ली पहुंचा दी। प्रदेश की सभी मंडियों में बिचाैलिए 90% तक प्याज बाहर भेज रहे हैं।

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