पांचवें यूजीसी वेतनमान के प्लेसमेंट में बड़ी अनियमितता, 8-10 लाख रुपए एरियर एक प्रोफेसर को
10 से 15हजार रु. माह का फायदा भी मिल रहा, 5 वर्ष की सर्विस अनिवार्यता की शर्त का दुरुपयोग
उच्च शिक्षा विभाग में कॉलेजों के प्रोफेसर्स को दिए जा रहे पांचवें यूजीसी वेतनमान के प्लेसमेंट (स्थानन) में बड़ी अनियमितता सामने आई है। मप्र शासन ने 1999 में 5वां यूजीसी वेतनमान लागू किया। इसमें 1996 की स्कीम में पात्र फैकल्टी को सीनियर स्केल में 5 वर्ष की सर्विस की अनिवार्यता की शर्त में छूट देकर नियमविरुद्ध तरीके से लाखों का फायदा वर्तमान में पहुंचाया जा रहा है।

इसमें विभागीय मंत्रालय व संचालनालय में ओएसडी बन कार्य कर रही फैकल्टी ने अपने फायदे के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिल नियमों को तोड़ मरोड़ कर फायदा लिया । साथ ही अपने जैसे करीब 300 प्रोफेसर्स को भी गलत लाभ पहुंचाया। इससे राज्य सरकार को 300 करोड़ से अधिक का नुकसान इस कोराना के संक्रमण काल में हुआ है।

इससे एक प्रोफेसर्स को 8 से 10 लाख रुपए एरियर मिल रहा है। साथ ही 10 से 15 हजार प्रतिमाह अतिरिक्त फायदा मिल रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए यूजीसी 7वें वेतानमान के लिए वित्त विभाग द्वारा दी गई सहमति का नियमविरूद्ध तरीके से वेतन प्लेसमेंट आदेशों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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