न्यू मार्केट के रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट पर व्यापारियों की आपत्ति के बाद ब्रेक लग गया है। न तो 45 अस्थायी दुकानों के स्थान पर तीन मंजिला मार्केट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो पाई और न वार्ड कार्यालय वाले भवन को तोड़ने की कार्रवाई शुरू हो पाई है। इस भवन को तोड़ने के खिलाफ न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ की याचिका पर न्यायालय से स्थगन मिल गया है।

महासंघ के अध्यक्ष सतीश गंगराडे ने कहा कि निगम ने इस भवन के जीर्णोद्धार पर 20 लाख रुपए खर्च किए हैं फिर इसे जर्जर बता कर धराशाई कैसे किया जा सकता है? दूसरी ओर 45 अस्थायी दुकानों के स्थान पर जी प्लस टू मार्केट बनाने की योजना भी अधर में लटक गई है। दुकानदारों को अभी पिंक पार्किंग में शिफ्ट नहीं किया गया है। इस नए मार्केट में नीचे ग्राउंड फ्लोर की 45 दुकानें तो मौजूदा दुकानदारों को ही आवंटित की जाएंगी। लेकिन ऊपरी दो मंजिलों पर प्रस्तावित कुल 40 दुकानों को नीलाम किया गया था।


इसके पहले तक हर दुकान की अलग नीलामी होती थी। न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ ने इसको लेकर नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त निकुंज कुमार श्रीवास्तव के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत कर कहा कि इससे न तो नीलामी में पारदर्शिता है और न आरक्षण के नियमों का पालन हो पाएगा।

सभी दिक्कतों का हल निकल जाएगा निगम

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